भारत और अमेरिका के बीच हुए नए India–US Trade Agreement को लेकर देश की राजनीति में घमासान मच गया है। आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद Sanjay Singh ने केंद्र सरकार पर सीधा हमला बोलते हुए कहा है कि यह समझौता भारतीय किसानों की पीठ में छुरा घोंपने जैसा है।
संजय सिंह ने कहा कि सरकार विदेशी कंपनियों को फायदा पहुंचाने के लिए देश के किसानों के हितों से समझौता कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस डील से भारतीय कृषि बाजार को नुकसान होगा और किसान बड़े कॉर्पोरेट्स के सामने कमजोर पड़ जाएंगे।
क्या है India–US Trade Agreement?
India–US Trade Agreement का मकसद दोनों देशों के बीच व्यापार को बढ़ाना है। इसके तहत कई सेक्टर्स में आयात-निर्यात को आसान बनाया जाएगा, टैक्स और टैरिफ में बदलाव किए जाएंगे और विदेशी कंपनियों को भारतीय बाजार में ज्यादा एंट्री मिलेगी।
लेकिन इसी को लेकर विपक्ष सवाल उठा रहा है कि कहीं यह समझौता भारत के किसानों और छोटे व्यापारियों के लिए नुकसानदायक तो नहीं साबित होगा।
संजय सिंह ने क्या कहा?
मीडिया से बातचीत में संजय सिंह ने कहा:
“सरकार ने किसानों की बिना सलाह लिए ऐसा समझौता कर लिया है, जिससे विदेशी कृषि उत्पाद भारत में सस्ते दामों पर आएंगे और देश का किसान बर्बाद हो जाएगा।”
उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका की कृषि कंपनियां पहले से ही भारी सब्सिडी पर काम करती हैं, ऐसे में भारतीय किसान उनके सामने कैसे टिक पाएगा?
सरकार पर गंभीर आरोप
AAP नेता ने आरोप लगाया कि सरकार इस डील के जरिए:
- किसानों के हितों की अनदेखी कर रही है
- विदेशी कंपनियों को सीधा फायदा पहुंचा रही है
- भारतीय कृषि व्यवस्था को खतरे में डाल रही है
संजय सिंह ने यह भी कहा कि सरकार सिर्फ बड़े उद्योगपतियों और मल्टीनेशनल कंपनियों के लिए फैसले ले रही है, जबकि असली मेहनतकश किसान को नजरअंदाज किया जा रहा है।
किसानों पर क्या असर पड़ेगा?
अगर इस समझौते के तहत अमेरिकी कृषि उत्पाद भारत में बड़े पैमाने पर आने लगे, तो इसका सीधा असर:
- फसलों की कीमतों पर पड़ेगा
- भारतीय किसानों की कमाई घटेगी
- मंडियों में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी
- छोटे किसान सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे
यही वजह है कि इस डील को लेकर किसान संगठनों और विपक्षी पार्टियों में नाराजगी देखी जा रही है।
राजनीतिक माहौल हुआ गर्म
India–US Trade Agreement अब सिर्फ आर्थिक मुद्दा नहीं रहा, बल्कि बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन चुका है। विपक्ष इसे चुनावी मुद्दा बनाने की तैयारी में है और सरकार से संसद में जवाब मांगने की बात कर रहा है।
AAP ने साफ किया है कि वह इस मुद्दे को लेकर संसद से लेकर सड़क तक आंदोलन करेगी।
डिजिटल इंडिया बनाम किसान इंडिया?
एक तरफ सरकार भारत को ग्लोबल इकॉनमी से जोड़ने की बात कर रही है, वहीं दूसरी तरफ विपक्ष सवाल उठा रहा है कि:
“क्या भारत को आगे बढ़ाने के नाम पर अपने ही किसानों को पीछे धकेला जा रहा है?”
यह सवाल आने वाले दिनों में और बड़ा होने वाला है।
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