Tuesday, February 10, 2026
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सुप्रीम कोर्ट की Meta को कड़ी फटकार: WhatsApp यूज़र्स की प्राइवेसी पर बड़ा फैसला

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भारत में डिजिटल प्राइवेसी को लेकर एक बार फिर बड़ा मुद्दा सामने आया है। देश की सर्वोच्च अदालत Supreme Court of India ने सोशल मीडिया कंपनी Meta को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा है कि WhatsApp जैसे प्लेटफॉर्म पर यूज़र्स के डेटा का इस्तेमाल बेहद संवेदनशील मामला है और इसमें किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जा सकती।

कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा कि करोड़ों भारतीय नागरिक WhatsApp पर अपनी निजी बातचीत, फोटो, वीडियो और बिज़नेस से जुड़ी जानकारी शेयर करते हैं। ऐसे में यह जानना ज़रूरी है कि यह डेटा किस तरह इस्तेमाल किया जा रहा है और क्या यह यूज़र्स की सहमति से हो रहा है या नहीं।


पूरा मामला क्या है?

दरअसल मामला WhatsApp की उस पॉलिसी से जुड़ा है जिसमें यूज़र्स के डेटा को बिज़नेस और विज्ञापन से जोड़ने की बात कही गई है। WhatsApp, जो कि Meta के अंतर्गत आता है, लंबे समय से अपने डेटा पॉलिसी को लेकर विवादों में रहा है।

सुप्रीम कोर्ट में यह सवाल उठाया गया कि क्या WhatsApp यूज़र्स का पर्सनल डेटा Meta के दूसरे प्लेटफॉर्म्स जैसे Facebook और Instagram के साथ शेयर किया जा रहा है। अगर हां, तो क्या इसके लिए यूज़र्स से स्पष्ट अनुमति ली गई है?

कोर्ट ने इस पर सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि डिजिटल प्लेटफॉर्म्स को यह नहीं भूलना चाहिए कि वे सिर्फ टेक कंपनियां नहीं हैं, बल्कि जनता की निजी ज़िंदगी से सीधे जुड़े हुए हैं।


कोर्ट ने क्या कहा?

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने Meta से सवाल किया कि जब एक आम यूज़र WhatsApp इस्तेमाल करता है तो वह सिर्फ मैसेजिंग के लिए करता है, न कि अपने डेटा को बिज़नेस टूल बनाने के लिए।

कोर्ट ने कहा कि:

“यूज़र का डेटा उसकी निजी संपत्ति है। कोई भी कंपनी इसे अपने फायदे के लिए बिना पूरी पारदर्शिता के इस्तेमाल नहीं कर सकती।”

इसके साथ ही कोर्ट ने यह भी जोड़ा कि अगर कंपनियां इस तरह से यूज़र्स का डेटा कमर्शियल तौर पर इस्तेमाल करेंगी, तो यह मौलिक अधिकारों का उल्लंघन माना जा सकता है।


WhatsApp यूज़र्स पर क्या असर पड़ेगा?

इस फैसले का सीधा असर करोड़ों WhatsApp यूज़र्स पर पड़ेगा। भारत में WhatsApp सिर्फ चैटिंग ऐप नहीं है, बल्कि यह डिजिटल पेमेंट, बिज़नेस कम्युनिकेशन और कस्टमर सपोर्ट का बड़ा माध्यम बन चुका है।

अब इस मामले के बाद:

  • कंपनियों को यूज़र्स को साफ बताना पड़ेगा कि उनका डेटा कैसे और क्यों इस्तेमाल हो रहा है।
  • यूज़र्स को ज्यादा कंट्रोल मिलेगा कि वे अपना डेटा शेयर करना चाहते हैं या नहीं।
  • भविष्य में WhatsApp की पॉलिसी और भी पारदर्शी हो सकती है।

बिज़नेस WhatsApp पर क्या असर?

आज लाखों छोटे और मध्यम बिज़नेस WhatsApp Business का इस्तेमाल कर रहे हैं। कस्टमर से बातचीत, ऑर्डर लेना और प्रमोशन करना – सब कुछ इसी प्लेटफॉर्म पर हो रहा है।

लेकिन कोर्ट की टिप्पणी के बाद अब यह सवाल भी उठ रहा है कि:

  • क्या बिज़नेस अकाउंट्स का डेटा भी Meta के विज्ञापन सिस्टम में जा रहा है?
  • क्या कस्टमर की जानकारी सुरक्षित है?

अगर नियम सख्त होते हैं तो बिज़नेस को भी अपने डिजिटल स्ट्रेटजी में बदलाव करना पड़ सकता है।


डिजिटल इंडिया और प्राइवेसी का संतुलन

भारत में डिजिटल इंडिया मिशन के तहत टेक्नोलॉजी को तेजी से अपनाया जा रहा है। लेकिन इसके साथ-साथ डेटा प्राइवेसी एक बड़ा मुद्दा बनता जा रहा है।

सुप्रीम कोर्ट का यह रुख यह दिखाता है कि सरकार और न्यायपालिका दोनों अब इस दिशा में गंभीर हो चुकी हैं। आने वाले समय में सोशल मीडिया कंपनियों के लिए भारत में काम करना पहले से ज्यादा नियमों और जवाबदेही के साथ होगा।


आम यूज़र को क्या करना चाहिए?

इस पूरे मामले से आम यूज़र को भी कुछ बातें समझनी चाहिए:

  1. हमेशा किसी भी ऐप की प्राइवेसी पॉलिसी ध्यान से पढ़ें।
  2. जरूरी न हो तो एक्स्ट्रा परमिशन न दें।
  3. अपने WhatsApp अकाउंट की प्राइवेसी सेटिंग्स समय-समय पर चेक करें।
  4. पर्सनल और बिज़नेस बातचीत अलग रखें।


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